जानें नया साल-नई उम्मीद- नई शिक्षा नीति से शिक्षा मैं क्या क्या होंगे बदलाव

लखनऊ। नई शिक्षा नीति सेआने वाले साल मैं सीखने-सिखाने की प्रक्रिया में व्यापक परिवर्तन देखने को मिलेंगें जिससे स्कूली बच्चों से लेकर विश्वविद्यालय के बच्चों के न केवल पढ़ाई के तरीके बदलेंगे बल्कि उनकी परीक्षा के मूल्यांकन मैं भी बदलाव बदलते साल के साथ देखने को मिलेंगे नई शिक्षा नीति के तहत भारत को भारतीय संस्कृति से भी जोड़ा जाएगा। अंग्रेजों ने हमारे दिमाग में यह बिठाया था कि ज्ञान की सारी रोशनी पश्चिम में है और भारत अंधकार का प्रतीक है। 1947 मे हमें आजादी मिलने के बाद भी उसे ही जारी रखा गया। आशा है कि अब इसे समाप्त किया 

मूक्स के ओपन ऑनलाइन कोर्सेज के जरिए होगी पढ़ाई- टेक्नोलॉजी और पढ़ाई का रिश्ता 19वीं और 20वीं सदी में कॉरेस्पांडेंस कोर्स के दौरान ही जुड़ गया था जब टीचर और स्टुडेंट के बीच संपर्क डाक के जरिए होता था. बाद में रेडियो और फिर टेलीविजन ने उसकी जगह ले ली. वैश्विक कोरोना महामारी के दौरान ऑनलाइन पढ़ाई की मजबूरियों के फलस्वरूप नए नए उन्नत शिक्षा उपकरणो जैसे मोबाइल,वेब कैमरा, हाइ स्पीड ब्रॉडबैंड, एचडी वीडियो,दूरदर्शन के शैक्षणिक चैनलों , स्वयं पोर्टल ,एन सी ई आर टी के किशोर मंच चैनल सहित एक दर्जन से अधिक निशुल्क उपलब्ध ऑनलाइन शिक्षा के मंचों के उपलब्ध होने सहित टीचिंग में नई खोज और नए तरीकों से कोर्सेज को डिजाइन करने की मूक्स के ओपन ऑनलाइन कोर्सेज मैं अपार संभावनाओं के कारण और भी प्रासंगिकता बढ़ गई है

ओपेन बुक परीक्षा-आने वाले साल मैं परीक्षा को लेकर स्कूल से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक ओपेन बुक परीक्षा के रूप मैं बदलाव देखने को मिलेंगे क्योंकि परीक्षा के पारंपरिक तरीके में छात्र रट्टा मारने के लिए मजबूर होते हैं ओपेन बुक परीक्षा मैं छात्रों को अपने साथ क्लास नोट्स, टेक्स्टबुक्स या अन्य स्टडी मटीरियल ले जाने की अनुमति होगी। छात्रों को रट्टा लगाने से आजादी मिलेगी और वे तनावमुक्त रहेंगे और उनमें समस्या को हल करने और सोचने की क्षमता में बढ़ोतरी होगी छात्रों की विषय को लेकर कॉन्सेप्ट को टेस्ट किया जाता है, बल्कि इन कॉन्सेप्ट का रियल लाइफ में प्रयोग करने की छात्र की योग्यता को भी परखा जाएगा खासतौर पर ऐप्लिकेशन, अनैलिसिस और इवैल्युएशन में स्टूडेंट्स की स्किल्स का परीक्षण करने में काफी मदद मिलेगी इस सिस्टम के तहत बने सारे प्रश्न रिसर्च पर आधारित होंगे। अच्छी तरह से पढ़ाई करने वाले विद्यार्थी ही इन सवालों का आसानी से जवाब दे पाएंगे। हर सवाल का जवाब देने के लिए उनके पास समय सीमा निर्धारित होगी

प्रोग्राम ऑफ इंटरनेशनल स्टूडेंट अससेस्समेंट अर्थात पीसा -नए साल मैं पीसा कार्यक्रम के अंतर्गत 15 साल से कम उम्र के बच्चों की क्रिटिकल क्रिएटिव थिंकिंग अर्थात रचनात्मक क्रियात्मक कौशल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाली मूल्यांकन प्रक्रिया प्रोग्राम ऑफ इंटरनेशनल स्टूडेंट अससेस्समेंट अर्थात पीसा द्वारा परखा जाएगा । वैसे इस टेस्ट की शुरुआत वर्ष 2000 में की गई थी। इसमें स्कूली विद्यार्थियों का पाठ्यक्रम पर आधारित मूल्यांकन नहीं होता, बल्कि इसमें विज्ञान परीक्षण और तकनीकी दक्षता का आकलन होता है। इसके लिए भारत सरकार और आर्गेनाइजेशन फॉर इकोनॉमिक कॉरपोरेशन डेवलपमेंट(ओईसीडी) में समझौता हो गया है।


खेल खेल में पढ़ाई- कोई भी ऐसा कार्यकलाप जिससे बच्चों को आनंद मिलता है, वह खेल होता है खेल से बच्चों का शारीरिक विकास, संज्ञानात्मक विकास, संवेगात्मक विकास, सामाजिक विकास एवम् नैतिक विकास के साथ साथ जीवन में आने वाली कठिन परिस्थितियों को सफलता पूर्वक पार करने की क्षमता भी विकसित होती है आने वाले साल मैं भविष्य की शिक्षा गतिविधि आधारित और सीखने की प्रक्रिया खेल खेल मैं देखने को मिलेगी नई शिक्षा नीति के तहत आने वाले साल मैं कठपुतलियां, मिट्टी के बने बर्तन और खिलौने बच्चों की पढ़ाई के लिए पहले अध्ययन के पाठ होंगे। ये खिलौने शिक्षक स्वयं बनाएंगे। आनलाइन खिलौने जिनमें मोबाइल, वेब एप्स, डिजिटल खिलौनों का इस्तेमाल के साथ साथ इलेक्ट्रानिक्स खिलौनों के साथ-साथ बोर्ड गेम्स, कार्ड गेम्स, पहेलियां, भूल-भुलैया, शिल्प कला आदि के खिलौने बच्चों की पढ़ाई को रोचक बनाएँगे इसके अलावा आंगनवाड़ियों में खिलौनों की मदद से साक्षरता बढ़ाने व बच्चों की शुरुआती पढ़ाई को और रोचक बनाया जाएगा

व्यावसायिक शिक्षा अर्थात वोकेशनल एजुकेशन पर रहेगा ज़ोर- ट्रडिशनल कोर्स ही नहीं, वोकेशनल प्रोग्राम में भी स्कोप है पिछले कुछ सालों में वोकेशनल फील्ड को चुनने का ट्रेंड बढ़ा है व्यावसायिक शिक्षा आधुनिक युग की नई मांग हैं। व्यावसायिक शिक्षा के महत्व को ध्यान में रखते हुए इसे राष्ट्रीय पाठ्यक्रम संरचना 2005 (NCF 2005) में भी सम्मिलित किया गया हैं। नई शिक्षा नीति मैं भी गुणवत्तापूर्ण व्यावसायिक शिक्षा की बात की गई है जो छात्रों को जीविकोपार्जन करने योग्य बनाए। सामान्यतः शिक्षा को व्यवसाय के साथ जोड़ना ही व्यवसायिक शिक्षा कहलाती हैं परन्तु वास्तव में इसका अर्थ इससे अधिक व्यापक हैं।आने वाले समय मैं व्यावसायिक शिक्षा छात्रों को शिक्षा के साथ साथ व्यवसाय चुनने एवं व्यवसाय संबंधित योग्यता प्राप्त कराने का भी अवसर प्रदान करेगी यानी वे भौतिकी के साथ संगीत पढ़ सकेंगे या फिर जीवविज्ञान के साथ फिलॉस्फी जैसा कोई विषय पढ़ सकेंगे। कुल मिलाकर लोगों में यह विश्वास लौटाना होगा कि हाथ से किया जाने वाला हर काम सम्मान के लायक है। जब हमारे छात्र हुनर सीख लेंगे तो उन्हें जीवन भर किसी पर आश्रित होने की नौबत नहीं आएगी।

परंपरागत ज्ञान की वैज्ञानिक कसौटी के साथ होगी पढ़ाई –देश में पारंपरिक ज्ञान का खजाना है। आयुर्वेद, स्वास्थ्य और योग के अलावा वास्तुकला, पदार्थ विज्ञान, दर्शन, रसायन विज्ञान और धातु कर्म आदि विषयों में भी परंपरागत ज्ञान प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है, लेकिन जानकारी के अभाव और इस ज्ञान के व्यवस्थित नहीं होने से इसका पर्याप्त उपयोग नहीं हो पा रहा है। नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के साथ ही देश के प्राचीन ज्ञान के को वैज्ञानिक कसोटियों पर खरा उतारकर वैज्ञानिक प्रमाणो के साथ स्कूलों से लेकर विश्वविद्यालयों के छात्रों को इससे जुड़े विभिन्न कौर्सेस देखने को मिलेंगे,इसी क्रम मैं परम्परागत ज्ञान अंकीय पुस्तकालय (टीकेडीएल) वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद, एवं अन्य मंत्रालयों के सहयोग से अंतर्राष्ट्रीय पेटेंट कार्यालयों में भारत से सम्बद्ध परम्परागत ज्ञान का गलत प्रयोग रोकने का पूर्व मै किया गया भारतीय प्रयास उल्लेखनीय है। विशेषकर कोरोना काल के सबक को देखते हुए परंपरागत औषधी विज्ञान हर्बल चिकित्सा पर विशेष महात्व दिया जाएगा


 नई भाषा नीति खोलेगी ज्ञान का रास्ता

भाषा ज्ञान के रास्तों को खोलती है लेकिन हमारे ही देश में अंग्रेजी पर हम सभी की अति-निर्भरता ने गाँव, कस्बों व शहरों तक के विद्यार्थियों को अंग्रेजी भाषा ज्ञान के अभाव के कारण विज्ञान और तकनीकी ज्ञान से वंचित कर दिया है. अगर हम अपने आसपास ही देखें तो विद्यालय तक विज्ञान की शिक्षा हिंदी में लेने वाला छात्र, उच्च शिक्षा में प्रवेश के समय अंग्रेजी पाठ्यक्रम व अंग्रेजी भाषा की अनिवार्यता व हिंदी भाषा में पाठ्यपुस्तकों में अभाव के कारण विज्ञान व तकनीकी पाठ्यक्रमों से दूरी बना लेता है. यह हमारी शिक्षा व भाषा नीति की विफलता है कि वह एक और आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है दूसरी ओर आजादी के इतने वर्षों उपरांत भी हम ज्ञान-विज्ञान के पाठ्यक्रमों को हिंदी, मातृभाषा व क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध कराने में असमर्थ हैं. जो थोडा बहुत उपलब्ध भी हो रहा है वह अनुवाद मात्र है और स्तरीय नहीं है इसी परेशानी को दूर करने के लिए नए वर्ष मैं नई शिक्षा नीति के तहत विज्ञान सहित सभी विषयों में उच्चतम गुणवत्ता वाली पाठ्य पुस्तकों को मातृ भाषा में देखने को मिलेंगी. बच्चे द्वारा बोली जाने वाली भाषा और शिक्षण के माध्यम के बीच अंतराल समाप्त किया जाएगा.भाषा के विकास में त्रिभाषा सूत्र को पुनः शामिल किया जाएगा इसमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं होगी. संस्कृत, पालि, फ़ारसी, प्राकृत के साथ ही तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और ओड़िया भाषाओं को भी विकल्प के रूप में शामिल किया जाएगा व पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाएगा.

नवाचारी शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा – आने वाले साल में शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार और सुधार दोनों बहुत तेजी से होंगे।जहां आने वाले साल मैं तीन से पाँच साल तक के लगभग 6 करोड़ बच्चों को उन्ही की क्षेत्रीय भाषा मैं शिक्षा मिलती हुई देखने को मिलेगी वहीं नवाचारी शिक्षा के कई रूप चाहे वो प्रकृति से विज्ञान को जोड़कर बायोनिक्स के रूप मैं या खेल खेल मैं विज्ञान या गणित और आई सी टी को विभिन्न पर्यावरणीय समस्याओं से जोड़कर बेहतर पर्यावरणीय ज्ञान ,या फिर छठवीं कक्षा से कोडिंग ,आर्टिफ़िश्यल इंटेलिजेंस,रोबोटिक्स एवं साइबर अपराध संबंधी पढ़ाई पर जोड़ दिया जाएगा 



कुल मिलाकर देखें तो छात्रों के संदर्भ में यह शिक्षानीति भविष्य में “जैसी जिसकी आवश्यकता, वैसी उसकी शिक्षा” प्रदान करने मैं सहायक होगी

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